अब आगे बढना है हमे
पथ मे कांटे कई बिछे है ,मार्ग रोकती बाधाए , लांघ कर इनको है जाना । पाषाण-सम बाधाओ को तोडकर, नदी की मानिंद बहना है हमे, आगे बढना है हमे, अब आगे बढना है हमे । मेहनत से हम जी न चुराए, साथ मिलकर श्रम-नीर बहाए । स्वर्ण-सम उज्जवलित रहने के लिये , श्रम-अग्न...
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सुमित ठाकुर
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[16 Oct 2008 14:10 PM]



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