मेरे सपनो की उडान

कुछ तुम कहो कुछ हम कहे मेरे सपनो की उडान , सर पर हो एक अपनी छत शहर मे हो एक अपना मकान चार पहियों वाला एक वाहन हो जिसमे घ्रर से दफ़्तर दफ़्तर से घर आवागमन हो । घर मे एक सुंदर पत्नी हो दफ़्तर मे एक सुंदर संगिनी हो बॉस सदा रहे मुझ पर मेहरबान मेरे सपनो की उडान । पत्नी मुझसे कभी न... [पूरी पोस्ट]
writer सुमित ठाकुर
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[18 Oct 2008 16:47 PM]

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