सत्यजीत रे !
सत्यजीत रे की कोई फ़िल्म तो अभी तक नहीं देख पाया हूँ, परन्तु इस बार उन की लिखी कहानियाँ पढने को मिलीं। मूलत: बांग्ला में लिखी यह लघु कहानियाँ प्रभात गुप्त द्वारा हिन्दी में अनुवादित हैं। कुल सात कहानीयों की कोई दो सौ पृष्ठों की पुस्तक मैंने दो बैठकों...
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Praney !
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[29 Jun 2008 11:13 AM]



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