'चाँद मेरा दिल'

PATHEY KANN घूम घुमा गधी फिर पीपल नीचे ही आ गयी न।' उस ने जैसे कोई घोषणा की हो। हालाँकि अपने उपन्यास पढ़ते पढ़ते नाश्ता करते मैं उस का तमकना न देख पाया। 'तुम्हारा भी कोई भरोसा नहीं है.................. ' काफी देर से वो हमेशा की तरह कुछ बड़बड़ कर रही थी और मैं हम... [पूरी पोस्ट]
writer Praney !

समाज

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Mar 2009 07:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix