'चाँद मेरा दिल'
घूम घुमा गधी फिर पीपल नीचे ही आ गयी न।' उस ने जैसे कोई घोषणा की हो। हालाँकि अपने उपन्यास पढ़ते पढ़ते नाश्ता करते मैं उस का तमकना न देख पाया। 'तुम्हारा भी कोई भरोसा नहीं है.................. ' काफी देर से वो हमेशा की तरह कुछ बड़बड़ कर रही थी और मैं हम...
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Praney !
समाज
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[18 Mar 2009 07:30 AM]



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