BHAVANAAO KA ABHAAV

THOUGHT सम्बंधों का अंतरजाल है जिंदगी.न केवल मनुष्य का मनुष्य से,अपितु पूरी पृथ्वी का आपस मे गहरा रिश्ता है.यह अस्तित्व मानो एक मकड़ी के जाले जैसा है.इसके अद्ऱ्श्य वा महीन धागेचर अचर सभी के साथ मजबूती से बंधे है.अहंकार मे कैद मनुष्य को भले ही यह मह्सूस न हों... [पूरी पोस्ट]
writer radhasaxena
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[24 Aug 2009 08:38 AM]

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