सनातन भाष्य
ओ वाक् दुनियावी सच और इंसानी फितरतों की साक्षी हो तुम. मर्मांतक सच है यह शरीर का तुम आधा हिस्सा हो प्रेरणा देती हो पौरुष जागता है तुम्हारे ही दर्प से हिंस्र-पशु का उफनता है अहंकार और अंतत: मिट्टी में मिलता है. ओ देवी! प्रलय का कापालिक क्योंकर जगाती ह...
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Atmaram Sharma
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[15 Sep 2008 07:32 AM]



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