रुटीन
हरेक अपने रुटीन का आदी होता है. यह बदलते ही छटपटाहट होती है. एक रुटीन के छूटते ही दूसरे को जमाने का प्रयास शुरू हो जाता है. लगातार एक जैसे काम नीरसता पैदा करते हैं और जोश में उन्हें बदलने की झोंक उठती है. एक बार जंगल में जानवरों की सभा हुई. सभी ने तय...
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Atmaram Sharma
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[26 Sep 2008 11:42 AM]



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