गड़े मुर्दे - 2

मन की बात मंज़ूर एहतेशाम के चर्चित उपन्यास 'सूखा बरगद' के एक पात्र से मुलाकात) तमाम हिम्मत जुटाकर मैं कॉफी हाउस में घुसा. पहली मंज़िल के कोने वाली टेबल पर विजय और रशीदा बैठे थे. विजय वेटर से कुछ कह रहा था. जबकि रशीदा बड़ी-सी खिड़की के पार दिखते चमकदार शोरूमों में... [पूरी पोस्ट]
writer Atmaram Sharma
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[22 Oct 2008 01:40 AM]

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