गड़े मुर्दे-3
मंज़ूर एहतेशाम के चर्चित उपन्यास 'सूखा बरगद' के एक पात्र से मुलाकात) यूँ तो विजय की कोठी की ओर मैं पहली बार जा रहा था. पर जाने क्यों सारा नज़ारा मुझे जाना-पहचाना लग रहा था. हालाँकि पिछले बीस वर्षों में इस इलाके का नक्शा ही बदल गया है. बेतरतीब इमारतें उ...
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Atmaram Sharma
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[24 Oct 2008 02:08 AM]



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