प्रिया! घर आने वाली हैं...

मन की बात मन से उठी पुकार प्रिया! घर आने वाली हैं... घर की थानेदार प्रिया! घर आने वाली हैं... कागद-पत्तर करो व्यवस्थित तकिया चारपाई और बिस्तर तेल का पीपा धरो यथावत होओ होशियार प्रिया! घर आने वाली हैं... विदा करो ठलुओं को घर से बरतन-भांडे माँजो फिर से करो सफाई... [पूरी पोस्ट]
writer Atmaram Sharma
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[24 Nov 2008 10:23 AM]

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