मैं और मेरा कुंबले
मुझे रह-रहकर बचपन के वो दिन याद आ रहे हैं जब कभी भारतीय गेंदबाज विकेटों के लिए तरसते नजर आते तो मैं जोर से चिल्लाता अरे! कुंबले को दो ना यार। ऐसे मौके कम ही याद आते हैं जब कुंबले मेरी उम्मीदों को पूरा करने में कामयाब न रहे हों। भारत मल्होत्रा अनिल...
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भारत मल्होत्रा
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[08 Nov 2008 00:43 AM]



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