ऎसी आज़ादी और कहाँ, आज़ाद ख़्याल विवेचन

कुछ तो है.....जो कि ! * विवेक भाई आग लगा कर अगले हफ़्ते के लिये बाई कर गये । गोया, चर्चाकार न हुये ज़मालो हो गये । यह तीसरी बार है, जब मैं इन चिट्ठाचर्चा वालों के उकसावे में पोस्ट लिखने को मज़बूर हो रहा हूँ । भुस्स मे आग लगा कर बी ज़मालो दूर खड़ी । मेरी पिछली कई पोस्ट से तो अंदा... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[31 Jan 2009 16:55 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix