कभी कभी मेरे दिल में..
यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है ... क्या केवल यही तो नहीं, कि " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें, " हम त...
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डा. अमर कुमार
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[29 Apr 2009 00:18 AM]



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