ज्योति सिंह
जो पहले दिया वो याद नहीं, पहले क्या था, हमें याद नहीं, तुम थे पर मेरे साथ नहीं, तुम्हें लेकर था, कोई ख़याल नहीं। वह सफर था बड़ा अनजाना यह है शुरुआत नई। (ज्योति सिंह मेरी अभिन्न मित्र हैं, रचना कर्म उनका पहला शगल है, कोशिश करूंगी की उनकी रचनाएं नियमित आ...
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वन्दना अवस्थी दुबे
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[05 Apr 2009 11:44 AM]



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