दुष्यंत की ग़ज़ल की पैरोडी -2
दुष्यंत की ग़ज़ल की पैरोडी -२ ( मूल मक्ता -ये जुबां हमसे सीं नहीं जाती जिन्दगी है कि जी नहीं जाती) नौकरी हमसे की नहीं जाती क्योंकि चमचागिरी नहीं आती अफसरों के विशाल बंगलों पर नाक हमसे घिसी नहीं जाती राजाशाही चली गयी होगी देश से अफसरी नहीं जाती उनके क...
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वीरेन्द्र जैन
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[02 Sep 2009 11:49 AM]



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