....यह उसकी ताक़त नही हमारी कमजोरी है !!
वर्षीय मंसूर अहमद , जिनके परिवार का एक एहम हिस्सा सरहद के उस पार कराची में रहता है - हर वर्ष किसी ना किसी अवसर पर पकिस्तान जाया करतें हैं , कभी कोई खुशी में शामिल होने तो कभी किसी ग़म में शरीक होने ! लेकिन इस बार उन्होंने ना जाने का मन बना लिया है। "...
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विक्षुब्ध सागर
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[24 Dec 2008 22:40 PM]



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