टीस...

खामोश पहलू ... बंगलोर की सड़को पर ये एक बहुत अजब मंज़र है कि आप किसी इंसान को रुक कर बात करते देख सकें... शायद वक्त की तंगी कह लें या ज़िन्दगी की दौड़ में भागते इंसान की लाचारी... उस दिन ऐ. टी. एम. से रूपये निकल कर वापस आते वक्त देखा... एक आदमी अपनी गोद में एक छोटा... [पूरी पोस्ट]
writer केतन कनौजिया 'शाइर'

कुछ यूँ ही...

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[17 Sep 2009 04:53 AM]

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