अनजाने रिश्ते...
दरिया सा बहता वक़्त और साहिल पे खड़ी ज़िन्दगी... यूँ मौजों की रवानी देखती है... कुछ लहरें जाते जाते कुछ सिखा सी जाती हैं... कुछ पशेमाँ कर जाती हैं... कुछ सुकूँ सा दे जाती हैं... ऐसे ही दो वाकये गुज़रे १ हफ्ते में दिल को भीतर तक खुश कर गए... हुआ यूँ क...
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केतन कनौजिया 'शाइर'
कुछ यूँ ही...
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[17 Sep 2009 04:52 AM]



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