दरख्त...
ज़िन्दगी का हर दौर अपने आप में इक अलग मज़ा लिए हुए होता है... जब सोच वापस घूमती हुई वहां पहुँचती है... बरसों पीछे बचपन के उन दिनों में... जब दुनिया भर की सारी परेशानियों से दूर हर दिन की शुरुआत होती थी माँ के हमें स्कूल जाने के लिए तैयार करने से... व...
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केतन कनौजिया 'शाइर'
कुछ यूँ ही...
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[17 Sep 2009 04:51 AM]



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