एक कतरा ख्वाहिश...
कभी कभी किसी पुरानी बात याद को याद करते हैं तो ऐसा लगता है ना कि कितना ग़लत था मैं.. और अपने आप इतना गुस्सा आता है कि बस.. "अबे तुझे कहा था गरम चाय लेकर आ.. ये क्या है.. बार बार समझाना पड़ेगा क्या तुझे.. एक बार में बात समझ में नही आती क्या बे तुझे.....
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केतन कनौजिया 'शाइर'
कुछ यूँ ही...
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[17 Sep 2009 04:52 AM]



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