तू न मिलता तो किसी और से बिछडे होते.. !!

खामोश पहलू ... इक दिन यूँ ही बेज़ारी में पन्ने पलटते पलटते नज़र इस शेर पर चली गयी.. वैसे हमारे उम्र के शायरों को ऐसे शेर खास तौर से पसंद आते हैं.. इक मुसीबत जो अक्सर हमारे साथ हुआ करती है वो ये है के महफिलों में लोग धड़ल्ले से ऐसे ही शेरों की फरमाइश किया करते हैं..... [पूरी पोस्ट]
writer केतन कनौजिया 'शाइर'

कुछ यूँ ही...

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[17 Sep 2009 04:48 AM]

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