बडी़ मुश्किल है बोलो क्या बताएं
एक नई ग़ज़ल ["मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन"पर आधारित] प्रस्तुत कर रहा हूँ... बडी़ मुश्किल है बोलो क्या बताएं । न पूछो कैसे हम जीवन बिताएं। अदाकारी हमें आती नही है , ग़मों में कैसे अब हम मुस्कुराएं। अँधेरा ऐसा है दिखता नही कुछ , चिरागों को जलाएं या बुझाएं। फ़...
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प्रसन्न वदन चतुर्वेदी
ग़ज़ल
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[20 Sep 2009 04:20 AM]



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