जो जैसा चल रहा था चलने देते

मेरी रचनाऍ जो जैसा चल रहा था चलने देते गलतफहमियों का दाय्ररा बढ्ने देते तो ही अच्छा था । दिल को बहलाने का बहाना तो था सतरंगे सपनों का खजाना तो था । कुछ कह कर हमने कुछ खो दिया कितनी सादगी से तुमने दिल तोड दिया उम्र भर भटकने को तन्हां छॉड दिया । -विपिन बिहारी गोय... [पूरी पोस्ट]
writer विपिन बिहारी गोयल
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[10 Aug 2009 17:24 PM]

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