थके हुए पाँव

मेरी रचनाऍ बालू रेत पर थके हुए पाँव का अक्स भी ऐसा ही उभरता है थका हुआ ,बोझिल सा एक समग्र और लक्ष्य भेदी जीवन का यही तो परिणाम है एक थकान वरना बालू की रेत पर हवा के झोंके से गुजर जाते और लहरों से अठखेलिया करते... [पूरी पोस्ट]
writer विपिन बिहारी गोयल
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[14 Aug 2009 06:38 AM]

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