उफ़, ये क्या हो गया

मेरी रचनाऍ उफ़ ये क्या हो गया बातों बातों में इजहार हो गया अब कैसे मिलाऊंगा मैं निगाहें तेरा साया तक शर्मसार हो गया आँख खुली तो तुम्हें आगोश में पाया मेरा जीवन फूलों की कतार हो गया तेरी चाहत बस युहीं बरकरार रहे मुझे खुदा पे एतबार हो गया... [पूरी पोस्ट]
writer विपिन बिहारी गोयल
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[17 Aug 2009 12:04 PM]

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