जिंदगी जब ठहराव होती है
जिंदगी जब ठहराव होती है हर सुबह शाम की बात होती है बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम तब खुद से खुद की बात होती है युहीं खो जाती हो तुम जब पास हो कर भी मुझे भी एक गुमशुदा की तलाश होती है जब भी हो जाता हूँ उदास हँसते हँसते यारों में तेरी बेवफाई की बात...
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विपिन बिहारी गोयल
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[19 Aug 2009 06:32 AM]



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