जिंदगी जब ठहराव होती है

मेरी रचनाऍ जिंदगी जब ठहराव होती है हर सुबह शाम की बात होती है बहुत खामोश हो जाता है जब सारा आलम तब खुद से खुद की बात होती है युहीं खो जाती हो तुम जब पास हो कर भी मुझे भी एक गुमशुदा की तलाश होती है जब भी हो जाता हूँ उदास हँसते हँसते यारों में तेरी बेवफाई की बात... [पूरी पोस्ट]
writer विपिन बिहारी गोयल
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[19 Aug 2009 06:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix