यात्रा
अनंत से अनंत की ओर,पूर्णता से पूर्णता की ओर , सत से सत की ओर ,प्रकाश से प्रकाश की ओर , यात्रा -वैकल्पिक नहीं अनिवार्य पुदगल कर्मबंधन अज्ञानजनित अनिवार्यता कछुए की तरह मंजिल की तरफ़ या हिरन की तरह माया के जल की तरफ़ दुर्गम -सुगम ,छांव -तपन ,मित्र -दुश...
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विपिन बिहारी गोयल
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[22 Aug 2009 03:46 AM]



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