डर
सुबह सुबह आँजुरी में अपने चमकती धूप लिए अँधेरी रात की गली के मुहाने पर आकर ठिठकी खड़ी है- शायद... मेरी आँखों की नमीं से वो भी डरी है....
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साधवी
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[02 May 2008 12:44 PM]



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