हाय, ये कैसी विडंबना है!
तू मेरा वर्तमान है.. मैं तुझसे मूँह चुराती हूँ.. तुझे देखने को भी मेरा मन नहीं करता! और फिर खोजने लगती हूँ तुझमें अपना भविष्य. सजाने लगती हूँ नये सपने! हाय, ये कैसी विडंबना है!...
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साधवी
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[27 Aug 2008 14:24 PM]



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