पांचवीं कहानी - पत्थर दिल
शिरीष, कैसे हो! फोटो से तो यही लगता है, आगे के सारे बाल झड़ गये हैं। शायद चांद भी निकल आयी हो। चश्मे का नम्बर तो पता नहीं बदला या नहीं, पर इस फोटो में तुमने जो चश्मा लगा रखा है, तुम पर जंच रहा है। वह पहले वाला लापरवाही का-सा अंदाज शायद अभी भी छोड़ा न...
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सूरज प्रकाश का रचना संसार
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[16 Mar 2008 23:19 PM]



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