चौदहवीं कहानी - फैसले

सूरज प्रकाश का रचना संसार......... बद्रीप्रसाद वापिस लौट रहे हैं। एकदम हताश। टूटे हुए। अपने ही घर से बेगाने होकर। अपनों द्वारा ही ठुकराए जा कर। यह ठुकराया जाना नहीं है तो क्या है? क्या इसी दिन को देखने के लिए इतने बरस इंतज़ार किया था उन्होंने! एकदम ठूंठ-से दिन गुज़ारे। तनहा रहे। जैसे... [पूरी पोस्ट]
writer सूरज प्रकाश का रचना संसार
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[19 May 2008 04:11 AM]

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