सत्रहवीं कहानी - डर
शारदा काम पर लौट आयी है। गोद में महीने भर का बच्चा लिये। दरवाजा मिसेज रस्तोगी ने खोला। उसे देखते ही खुश हो गयीं, ''बधाई हो शारदा। अच्छा हुआ तू आ गयी। तू जो ल़ड़की लगा गयी थी थी, वह तो एकदम चोट्टी थी। नागे भी कितने करती थी। देखूं तो सही, कैसा है तेरा...
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सूरज प्रकाश का रचना संसार
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[17 Jul 2008 07:50 AM]



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