शेष .....

shahroz  ka rachnasansaar खिड़की से झांकता हुआ पार्क या बस स्टाप पर गुटुरगूं करते युगल को देख कबाब बन धुंआ उगलता जाएगा उसका विश्वास लबरेज़ होगा की सारी स्त्रियों को सिर्फ़ वही तृप्त कर सकता है । शेष रविवार में ...... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[24 Jun 2008 18:53 PM]

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