खड्गसिंह

shahroz  ka rachnasansaar बस्स धुन में चढ़ते जाना पहाड़ों और पेड़ों पर इससे बिल्कुल अंजान कि वहाँ काँटे और ज़हरीले जीव भी हैं बचपन की आदतें कहीं छूटती भी हैं । हम सब कुछ भला-भला सा समझने के आदी जो ठैरे जानती तो थी कि वह कई अस्तबलों में जाता है अब उबकाई आती है कहते कि वह बिल्कुल... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[06 Jul 2008 13:06 PM]

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