दिल पर रख कर हाथ कहिये, देश क्या आजाद है
सवाल दर सवाल है , हमें जवाब चाहिए और ये सवाल उनका है, जो दमित हैं, दलित हैं, शोषित हैं । बड़े अनमने ढंग से लिख रहा हूँ। उत्सव की गहमा-गहमी और मैं कहाँ दुखियारों और पीडितों , गरीबों की बात लेकर बैठ गया। मुझे सिवा अश्वनी की एतिहासिक जीत के कुछ और नज़र न...
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शहरोज़
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[14 Aug 2008 17:02 PM]



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