शर्म उनको मगर नहीं आती !

shahroz  ka rachnasansaar पिछले दिनों उर्दू लेखकों की धर्मान्धता पर मैंने सवाल उठाया था.अच्छा लगा कई लोग मेरे साथ खड़े हुए.मेरा मानना है कि साम्प्रदायिकता अल्पसंख्यक समाज की हो या बहुसंख्यक समाज की दोनों खतरनाक होती है. सतीश सक्सेना जी ने प्रतिक्रिया दी।आप ख़ुद भी विद्वान् हैं... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[18 Aug 2008 19:57 PM]

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