दिल-ए नादां तुझे हुआ क्या है
ग़ालिब साहब की ये गजल राजेश गुप्ता जी ने दी थी उनको गजल गाने का और महफ़िल में पढने का बड़ा शौक है उनकी कई गजले अख़बार में छपती रहती है जब भी रात को ९ के बाद उनसे मिलता हूँ क्योंकी टाइम ही उसी समय मिलता है एक आध गजल वो जरुर सुनाते है ग़ालिब साहब की शायरी...
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sweet_dream
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[26 Aug 2009 14:54 PM]



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