बाबूजी के न रहने पर.....

apni baat!  Umesh Pathak ke saath. थका हारा इन्सान जब तपती धूप में थक कर किसी घने बरगद की छावं में विश्राम करता है,ऐसे में जो अनुभव होता है वैसा ही पिता के साए का भी अनुभव होता है!सचमुच कितना सुकून मिलता है जब तक सर पर पिता का साया होता हैआज इसे मै बड़ी शिद्दत से महसूस कर रहा हूं !दर्... [पूरी पोस्ट]
writer Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[29 May 2009 12:08 PM]

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