ये इन्कलाब गुज़र जाने दो !

apni baat!  Umesh Pathak ke saath. उमेश पाठक ये इन्कलाब गुज़र जाने दो ! चढा सैलाब उतर जाने दो! प्यास बुझती नही मैखानों में , तुम अपनी यादों के पैमाने दो! दार पर मुझको चढा दो यारो, नाम कुछ इश्क में कर जाने दो! उनसे मिलने की तमन्ना है जवां लगी है आस ,मगर जाने दो ! अपने बारे में कभी सोचे... [पूरी पोस्ट]
writer Umesh Pathak / उमेश पाठक
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 May 2009 21:38 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix