धुंध-सी जिन्दगी

sandhya gupta सशंकित आकाश है मद्धिम ...मद्धिम सांस तीक्ष्ण तारों की टिम-टिम आंख कंपकंपाते अंधेरों की थर्राहटों के बीच... जीवन जमीं पर उतरता आंखें शून्य में पुतरतीं सांसें धुंएं में खो जातीं कल/आज/कल पल...पल... जीने को विवश हम अधकचरी अनगढ़ एक धुंध-सी जिन्दगी! ------... [पूरी पोस्ट]
writer sandhyagupta
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[04 Oct 2008 03:38 AM]

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