एक गैर दुनियादार शख्स की मृत्यु पर एक संक्षिप्त विवरण़......
एक विडम्बना ही है और इसे गैर दुनियादारी ही कहा जाना चाहिये जब शहर में हत्याओं का दौर था.....उसके चेहरे पर शिकन नहीं थी रातें हिंसक हो गयी थीं और वह चैन से सोता देखा गया यह वह समय था जब किसी भी दुकान का शटर उठाया जा रहा था आधी रात को और हाथ असहाय मालू...
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sandhyagupta
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[17 Oct 2008 12:15 PM]



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