वह संसार नहीं मिलेगा

sandhya gupta और एक रोज़ कोई भी सामान अपनी जगह पर नहीं मिलेगा एक रोज़ जब लौटोगे घर और....वह संसार नही मिलेगा वह मिटटी का चूल्हा और लीपा हुआ आंगन नहीं होगा लौटोगे .....और गौशाले में एक दुकान खुलने को तैयार मिलेगी घर की सबसे बूढ़ी स्त्री के लिये पिछवाड़े का सीलन और अंधे... [पूरी पोस्ट]
writer sandhyagupta
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[24 Oct 2008 22:29 PM]

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