क्या कहूं अनजान हूं पर
क्या कहूं अनजान हूं, पर जानना चाहता हूं मैं, जानना चाहता हूं, कि, तुम क्या सोचती हो? उस बारे में, जिस बारे में, मैं, अभी तक अनभिज्ञ हूं उस पीड़ा के बारे में, जिसकों सहा है सिर्फ नारी ने। वो दर्द होता है अपना, पर, उसकी महक होती सब जगह उसकी महक से महकत...
[पूरी पोस्ट]
Nitish Raj
8
0
0
0
0
[12 Sep 2008 06:53 AM]



Shuffle








