एक कमरा छोटा सा, मेरा अपना

POEM OF SOUL एक कमरा छोटा सा, अपना सा, कुछ चुनिंदा किताबें इधर भी, उधर भी, कुछ पन्ने यहां भी, वहां भी। एक सपना लिए हुए कुछ मेरे मन के कुछ उन के, जो इसमें पहले रह चुके उन चुनिंदा लफ्जों के बीच, मेरा बिस्तर। बिस्तर पर मैं, तकिया-चादर लगाए, सिरहाने से उठता धुआं एश्ट... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[20 Sep 2008 06:33 AM]

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