निशान ‘ताज’ की दीवार का

POEM OF SOUL धर्म का ना जात का हजारों के आघात का क्यों पनप रहा ये ज़हर इंसानी जज़्बात का। करता है छेद लाखों दिल में मेरे, जब भी देखता हूं निशान ‘ताज’ की दीवार का। आपका अपना नीतीश राज (फोटो साभार-गूगल)... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[16 Dec 2008 19:30 PM]

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