आफ़िस से घर तक

चलते चलते एक दिन और ख़त्म और आज फिर घर जल्दी आ गया. एक मित्र ने कर्नाटिक संगीत की सी.डी भेंट की थी, इसे समझने की कोशिश जारी है. समझ मे कुछ खास नही आ रहा है पर एक कशिश है. किसी ने सही कहा है संगीत भाषाओं की सीमा से परे है. संगीत जब दक्षिण को है तो आज खाने मे भी... [पूरी पोस्ट]
writer vikas pandey
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[23 Jun 2008 10:27 AM]

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