इसका गुलशन फूंक दूं उसका शबिस्तां फूंक दूं
नज़्में जिन्होंने जंग-ए-आज़ादी का जज़्बा जगाया
आज़ादी के संघर्ष में हिन्दुस्तानी ज़बान में लिखी गई नज़्मों, ग़ज़लों के योगदान की चर्चा कर रहे हैं शकील अख़्तर। नवप्रभात ग्वालियर से पत्रकारिता की शुरूआत करने वाले शकील ने इंदौर में नई दुनिया, चौथा संसार...
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neerajdiwan
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[14 Aug 2007 09:20 AM]



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