क्रांति का मैनेजमेंट
मन अत्यंत दुखी है। एक रमेश (लालू जी तो कै रहे थे रमेसवा..)। उसे शर्म नहीं आई? उसने बजाए इस बात के अपना नाम जयराम के जगह जॉयरम करवा लेता… अम्बिका सोनी पर ही सवाल उठा दिया। इसकी घोर निंदा की जानी चाहिए। कहां से कहां पहुंच गया चमचिस्तां हमारा? इसल...
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neerajdiwan
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[17 Sep 2007 06:48 AM]



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