तुम्हारी आंखे बहुत पूछती हैं

shuruwat तेरी ये बेबस सी ऑंखें ,कई सवाल उठाती है , जवाब देना है मुश्कील,मेरी आंखे कुछ कह नही पाती है, निश्छल प्रेम के अंजाम के बारे मे पूछती है , कहाँ तक जाना है ,उस रास्ते के बारे मे पूछती है, छोटे से घर के छत के बारे मे पूछती है, गलियों मे घूमती सड़क के बार... [पूरी पोस्ट]
writer mere shabd
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[25 Aug 2009 11:24 AM]

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