आखिर मैं दिवाली मनाता कैसे

Halla Bol धमाकों ने देश हिलाया नदियों ने भी कहर ढाया न जाने कितने अनाथ हुए और कितने मांगे उजड़ गईं उन उजड़ी मांगो के सामने पूजा कर तिलक लगाता कैसे आखिर मैं दिवाली मनाता कैसे सहमी हुई साँसों को लिए टूटे सपने टूटी आशायें भरी उन घबराई पथराई सी आँखों को इस आसमान मे... [पूरी पोस्ट]
writer Vishal Mishra
views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[28 Oct 2008 06:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix